Wednesday, April 21, 2010

मेरी साईकिल......

ये मेरी साईकिल......
अब तो मै खुद ही धुमने जा सकती हुं.  है ना पापा.......

2 comments:

अक्षिता (पाखी) said...

बहुत प्यारी सायकिल. हमें भी घुमाना पाखी.

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'पाखी की दुनिया में' पुरानी पुस्तकें रद्दी में नहीं बेचें, उनकी जरुरत है किसी को....

रावेंद्रकुमार रवि said...

सुंदर होने के कारण
चर्चा मंच पर

झिलमिल करते सजे सितारे!

शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!